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Pooja in Haridwar: Powerful Rituals and its importance

Pandit Ji for Pooja in Haridwar

हरिद्वार में पूजा पाठ और उसका महत्व

देवों की नगरी हरिद्वार अपनी आध्यात्मिकता के लिए मशहूर है और तमाम तरह के कर्मकांडों और चमत्कारों को अपने अंदर समेटे हुए एक अलग ही आकर्षण रखती है। हरिद्वार खूबसूरत शहर होने के साथ ही साथ हिन्दू आध्यात्मिकता का केंद्र भी है। हरिद्वार का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। सनातन धर्म में कर्मकांड व् पूजा विधान का एक महत्वपूर्ण स्थान है। हरिद्वार में गंगा जी आध्यात्मिकता को एक अलग ही रूप देती हैं।
हरिद्वार में हर तरह की पूजा पाठ कर्म-काण्ड इत्यादि होते है और कुछ ख़ास ऐसे कर्म-काण्ड भी है जो हरिद्वार में अपनी एक अलग महत्वता रखते हैं जैसे पिंडदान, पितृ पूजा, नवग्रह पूजा, नारायणी पूजा, रुद्राभिषेक इत्यादि।

पितृ पूजा व् पिंड दान

पितृ पूजा और पिंड दान सनातन संस्कृति के मूल आधार भी कहे जा सकते हैं। पितृ यानि की आपके पुरखे जो परलोक सिधार चुके है उनकी आत्मा की शांति के लिए व् उन्हें खुश करने के लिए ही पितृ पूजा की जाती है। सनातन धर्म में मान्यता है की मृत्यु के बाद अगर मृत व्यक्ति का पिंड दान उनके सगे सम्बन्धियों द्वारा नहीं किया जाता है तो वे इस लोक में ही फसे रह जाते हैं और उन्हें मुक्ति नहीं मिल पाती है। पितरों का अनादर करने या पितरों की पूजा न करने से पितृ दोष लगता है जो पितृ पूजा व् पिंड दान करने से ही मिटता है। पितृ पूजा में पित्रों के नाम पर पिंड दान किये जाते हैं, पित्रों से आशीर्वाद की कामना करते है और जाने-अनजाने में हुए अपराधों के किये क्षमा मांगते हैं।
हरिद्वार में पितृ पूजा का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योकि गंगा को मोक्षदायिनी कहा जाता है और गंगा जल को पवित्र जल माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार गंगा का पृथ्वी लोक पर अवतरण प्राणियों की मुक्ति के लिए ही हुआ था। हरिद्वार जहा अमृत की बूंदें गिरी थी और जो कई ऋषि मुनियों की तपस्थली भी है वहा पितृ पूजा करने का विशेष फल मिलता है।

नारायणी पूजा

पितृ दोष के निवारण के लिए नारायणी पूजा का विशेष महत्व है, हरिद्वार के नारायणी मंदिर में नारायणी शिला है जो की भगवान् नारायण यानि की भगवान् विष्णु को समर्पित है। पंडितों व् विद्वानों के अनुसार नारायणी शिला पर जल चढ़ाने मात्र से ही नाराज पितृ शांत हो जाते हैं। परिवार में क्लेश रहना, अकारण किसी की मृत्यु होना, संतान प्राप्ति में बाधा, जीवन में अशांति होना पितृ दोष के लक्षण हैं, जो की पितृ पूजा से ही दूर हो सकते हैं। नारायणी पूजा पितरों को शांत करने के लिए बहुत ही सिद्ध मानी गयी है, यही कारण है की अमावस्या के दिन देश भर से लोग यहाँ आकर अपने पितरों की शान्ति के लिए पूजा पाठ करते हैं। भगवान् विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने और पित्रों के मोक्ष के लिए नारायणी पूजा बहुत ही फलदायी है।

नवग्रह पूजा

सनातन धर्म के अनुसार किसी भी व्यक्ति के जीवन की सभी घटनाएं नवग्रहों की चाल और उनकी स्थिति से जुडी हुई हैं। ज्योतिष गणना करके व्यक्ति की कुंडली बनती है और उस कुंडली के अनुसार ग्रहो की स्थिति को देखकर व्यक्ति के जीवन में आने वाली या चल रही मुश्किल परिस्थितियों का पता ज्योतिषी लगाते हैं। ग्रहो की चाल व् ग्रहों की स्थिति अनुकूल न होने पर गृह दोष उत्पन्न होता है जो मनुष्य के जीवन में कठिनाइयाँ पैदा करती है। गृह दोष निवारण के लिए ज्योतिष कई तरीके बताते हैं और उनमे से नवग्रह पूजन गृह दोष को दूर करने में सबसे उपयोगी माना जाता है।
नवग्रह पूजन में नौ ग्रहों की पूजा होती है और उनके आशीर्वाद की कामना की जाती है। नव ग्रहों में सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रह आते हैं। सूर्य प्रताप व् तेज के प्रतीक हैं, अतः इनकी पूजा तेज व् यश की वृद्धि के लिए की जाती है, चन्द्रमा की पूजा शीतल व् निर्मल तन-मन के लिए की जाती है। इसी प्रकार सभी ग्रहों की पूजा जीवन पर ग्रहों के प्रभावों को देखकर की जाती है।

हरिद्वार में अन्य कई प्रकार के अनुष्ठान, यज्ञ, पूजा इत्यादि धार्मिक कार्य चलते रहते हैं। वैसे तो धार्मिक अनुष्ठान आप कही पर भी कर सकते हैं पर हरिद्वार में जिसे देवों की भूमि भी कहा जाता है और जहाँ माँ गंगा साक्षात् रूप में विद्यमान हैं, आकर धार्मिक कार्य करने का अलग ही अनुभव आपको होता है। शायद यही कारण है की देश दुनिया से श्रद्धालु यहाँ आते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यों में संलिप्त होते हैं।

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